देहात संस्था ने दी 1506 कोरोना प्रभावित परिवारों को मदद





अपनाई गई स्वाभिमान व सम्मान पूर्ण राहत पद्धति





बिछिया/बहराइच l बहराइच समेत उत्तर प्रदेश के 6 एवं महाराष्ट्र के 5 जनपदों में विगत दो दशकों से बाल अधिकार, मानव तस्करी, महिला सशक्तिकरण, कृषि आधारित आजीविका आदि मुद्दों पर कार्यरत स्वैच्छिक संस्था-डेवलपमेंटल एसोसिएशन फार ह्यूमन एडवांसमेंट (देहात) द्वारा कोरोना महामारी के कारण उपजी भूख की समस्या से ग्रस्त अब तक कुल 1506 परिवारों को पोषण राशन किट उपलब्ध कराई जा चुकी है।





देहात संस्था के मुख्य कार्यकारी जितेन्द्र चतुर्वेदी ने बताया कि मार्च महीने में हुए लाकडाऊन के समय से ही संस्था ने इस दिशा में सोचना शुरू कर दिया था।





संस्था के कुल 57 वेतनभोगी पूर्णकालिक कार्यकर्त्ताओं ने अपने वेतन से दान कर एक कोष बनाकर राहत कोष प्रारंभ किया था। उसके पश्चात संस्था द्वारा  एक अपील जारी की गई थी जिससे यह कोष कुछ और बढ़ा।
कुछ अन्न दान व सामग्री भी प्राप्त हुई। इस बीच देहात संस्था के मुख्य कार्यकारी जितेन्द्र चतुर्वेदी के अनुरोध पर पुणे स्थित कंपनी मार्स इंटरनेशनल द्वारा निर्मित पौष्टिक स्नैक्स गोमो के 55000 पैकेट टाटा ट्रस्ट एवं दि इंडिया न्यूट्रीशन इनीशिएटिव द्वारा उपलब्ध कराए गए और इसके पश्चात देहात संस्था के प्रस्ताव व अनुरोध पर 1000 परिवारों को 15 दिनों के लिए राशन किट उपलब्ध कराने के लिए अज़ीम प्रेमजी फिलेंथ्रापिक इनीशिएटिव-बेंगलुरु की मदद प्राप्त हुई।





फिर देहात संस्था की समूची टीम वास्तव में वंचित व पात्र परिवारों को ढूंढने निकल पड़ी।





विशेषकर मिहींपुरवा विकास खंड के वनवासी आदिवासी क्षेत्रों के 21 गांव व नवाबगंज विकास खंड के भारत नेपाल सीमा वर्ती16 गांव इसलिए चुने गए क्योंकि अति पिछड़े होने के साथ ही यहां के एक एक परिवार की वंचना के बारे में देहात संस्था की अपनी समझ है। कारण यह कि संस्था यहां लंबे समय से कार्यरत है।





पात्र परिवारों में विधवा, विकलांग, एकल महिला, बुजुर्ग व बीमार मुखिया वाले परिवारों को प्राथमिकता दी गई।





पात्र परिवारों के घर कूपन  पहुंचाए गए और उन्हीं के गांवों में तय समय व स्थान पर परिवारों को बुलाकर राहत देने की परंपरागत पद्धति के विपरीत पात्र द्वारा स्वत: राहत सामग्री अपने हाथों से लेने की पद्धति अपनाई गई। संस्था के मुख्य कार्यकारी जितेन्द्र चतुर्वेदी बताते हैं कि इस पद्धति को अपनाने के पीछे मूल भावना यह थी कि जब हम किसी को अपने हाथों कुछ दान करते हैं तो देने वाला स्वयं को बड़ा और लेने वाला स्वयं को हीन होने का अहसास करता है। पात्र द्वारा स्वत: राहत लेने से उसका स्वाभिमान बना रहता है। संस्था अब तक 1506 परिवारों को 15 दिनों का भरपूर पोषण युक्त राशन किट उपलब्ध करा चुकी है।इस बीच पहली जून से चले सघन राहत अभियान को आज विराम दिया गया। जबकि देहात की हेल्पलाइन पर भूख से ग्रस्त परिवारों की मदद जारी रहेगी।





इस बीच चले राहत अभियान में मिहींपुरवा के टेढिया, कैलाशनगर, कुडकुडीकुआं, भेडहनपुरवा, जमुनिहा, राजाराम टांडा, नरायनटांडा, गुलरा, बाजपुर बनकटी, बिशुनटांडा, बढिनपुरवा, सीताराम पुरवा, विशुनापुर, बर्दिया, फकीरपुरी, रमपुरवा व बिछिया आदि गांवों एवं नवाबगंज विकास खंड के गोकुलपुर, निबिया, बक्शीगांव, पंडित पुरवा, मिहींपुरवा, केवलपुर, रूपैडीहा आदि गांवों में गांव वार शिविर लगाकर राहत दी गई।





राहत दल में दिव्यांशु चतुर्वेदी, सूर्यांशु चतुर्वेदी, रमाकांत पासवान, विजय यादव, गीता प्रसाद, सरिता, देवेश अवस्थी, गोविंद अवस्थी व पवन यादव समेत 216 वालंटियर शामिल रहे।


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