भारत को दबाव में लाने का सपना देख रहा चीन खुद दबाव में, डोभाल का ये प्लान हुआ कामयाब..!





नई दिल्ली : चीन ने लद्दाख के कुछ इलाकों से अपने सैनिकों को पीछे हटा लिया है। चीन का यह ‘हृदय परिवर्तन’ यूं ही नहीं हुआ है। भारत की अचूक रणनीति ने उसे अपने कदम वापस खींचने को मजबूर किया है। सबसे पहले तो चीन को झटका तब लगा जब उसे समझ आ गई कि उसकी तरफ से अचानक सैनिक बढ़ाने से भारत बिल्कुल भी दबाव में नहीं आया।





भारतीय सैनिकों को हक्का-बक्का करना चाहता था चीन
दरअसल, 5 और 6 मई को पूर्वी लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद चीनी सैनिकों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी तादाद बढ़ानी शुरू कर दी। उसे लगा कि बहुत तेजी से बड़ी संख्या में एलएसी की तरफ आते चीनी सैनिकों को देख भारतीय सैनिक हक्का-बक्का रह जाएंगे और दबाव में आकर पीछे हट जाएंगे। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और भारत ने भी तुरंत चीन के मुकाबले कुछ ज्यादा संख्या में ही सैनिकों को एलएसी की तरफ मूव कर दिया। सैन्य मामलों के जानकार नितिन गोखले दावा करते हैं कि दोनों तरफ के सैनिकों में किसी ने एलएसी नहीं लांघी।

NSA डोभाल ने की बात और बनी यह सहमति
गोखले बताते हैं कि 8 मई को जब चीन ने अपने इलाके में सैनिकों और युद्ध सामग्रियों का जमावड़ा शुरू किया तो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने चीन के विशेष प्रतिनिधि यांग जीची से बात की और दोनों ने अपने-अपने सैनिकों को माहौल में नरमी लाने का निर्देश दिए जाने पर सहमति जताई। डोभाल के निर्देश पर भारतीय सैनिकों का जमावड़ा तब तक रुका रहा जब तक कि फिंगर 4 और फिंगर 8 के पास चीनी सैनिकों की संख्या नहीं बढ़ने लगी।

भारत ने अपने सर्विलांस सिस्टम के जरिए चीनी गतिविधियों पर नजर बनाए रखा। तब पता चला कि 50-60 की तादाद में चीनी सैनिक पीपी 14 और पीपी 15 पर पहुंचने लगे तो भारत ने भी 70-80 सैनिक मौके पर भेज दिए। इसी तरह, दूसरे इलाकों में चीन की बराबरी के सैनिक, युद्ध सामग्री और भारी वाहनों की तैनाती होती रही। 

दबाव काम नहीं आया तो बातचीत का रास्ता अपनाया
दबाव की रणनीति काम नहीं आता देख चीन ने बातचीत के रास्ते पर कदम बढ़ाया। लोकल लेवल पर कम-से-कम दर्जनभर मीटिंग के बाद 6 जून को जब लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की मीटिंग हुई तो भारत ने साफ कर दिया कि दोनों देशों ने अपने-अपने इलाकों में जो सैनिक, युद्ध सामग्री और वाहन जमा किए, उन्हें हटाना होगा। भारत ने कहा कि चूंकि चीन ने जमावड़ा शुरू किया था, इसलिए पहल उसे करनी होगी।

6 घंटी की मीटिंग में 5 अहम मुद्दों पर बातचीत
गोखले बताते है कि 6 जून को भारतीय सेना की लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और साउथ चिनचिनयान मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के मेजर जनरल लियु लिन के नेतृत्व में दोनों देशों का प्रतिनिधिमंडल चीनी क्षेत्र मॉलडो में मिला। 11.30 बजे शुरू हुई बातचीत छह घंटे चली। गोखले के मुताबिक, पहले आधे घंटे तक सिंह और लिन ने बातचीत की और फिर अगले दो घंटे तक डेलिगेशन लेवल मीटिंग हुई जिनमें भारत की तरफ से 10 से 15 सैन्य अधिकारी थे और इतनी ही तादाद में सैन्य अधिकारी चीन की तरफ से भी थे। फिर लंच हुआ और लंच के बाद भी मीटिंग हुई। 






बकौल गोखले इस बातचीत में 5 प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें लद्दाख के चार इलाकों फिंगर 4, पेट्रोलिंग पॉइंट 14, पेट्रोलिंग पॉइंट 15, पेट्रोलिंग पॉइंट 17A से दोनों तरफ के सैनिकों की संख्या घटाना और अपने-अपने इलाकों में किए गए जमावाड़ों को धीरे-धीरे खत्म करना शामिल हैं। दोनों तरफ से एलएसी से 20-30 किमी दूर अपने-अपने इलाकों में सैनिकों और वाहनों का जमावड़ा किया गया है।

अब फिंग-4 एरिया पर फंसा है मामला
गोखले कहते हैं कि पेट्रोलिंग पॉइंट 14, पेट्रोलिंग पॉइंट 15 और पेट्रोलिंग पॉइंट 17 ए का मुद्दा सिंगल या डबल स्टार लेवल मिलिट्री ऑफिसर्स (ब्रिगेडियर या मेजर जनरल लेवल) की मीटिंग में सुलझा लिए जाएंगे। इसकी काफी उम्मीद है। हालांकि, पेंगोंग त्सो लेक में फिंगर- 4 एरिया पर कायम गतिरोध को खत्म करने के लिए उच्चस्तरीय अधिकारियों की बातचीत की दरकार पड़ेगी। इसके लिए फिर से लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बातचीत हो सकती है।


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